Saturday, 25 June 2016

लक्ष्य प्राप्ति का अनुपम आयाम

जीवन स्वयं को पहचानने और अपने कर्तव्यों के आधार पर लक्ष्य प्राप्ति का एक अनुपम आयाम है। परन्तु, मनुष्य अपनी विफलताओं के लिएईश्वर को दोषी मानता है। यह उसकी स्वार्थ भावना का प्रतीक है।

ईश्वर हर व्यक्ति में उपस्थित है, मात्र आवश्यकता है, उस निरंकारी आत्मा को पहचानने की।

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