Monday, 27 June 2016

स्नेह अद्र्श्य है और अद्भुत भी

स्नेह अदृश्य है और अद्भुत भी ....!!! लेकिन हृदय के लिए यह आवश्यक है कि सही समय पर सही स्नेह से परिचय हों, जो दूरगामी हो और विश्वशनीय भी..!!!

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